गिरिडीह/डुमरी- गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां बलथरिया पंचायत के पंचायत सेवक सुखलाल महतो की इलाज के दौरान मौत हो गई। रांची के रिम्स अस्पताल में उनकी अंतिम सांस लेने से पहले उन्होंने एक पत्र और बयान के माध्यम से डुमरी बीडीओ सहित चार लोगों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले ने अब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
डुमरी प्रखंड कार्यालय परिसर में शुक्रवार को पंचायत सेवक सुखलाल महतो ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। गंभीर हालत में उन्हें डुमरी रेफरल अस्पताल लाया गया, वहां से पीएमसीएच और फिर रिम्स रेफर किया गया था। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
मरने से पहले लिखा था पत्र, लगाए गंभीर आरोप

सुखलाल महतो ने मरने से पहले सोशल मीडिया पर एक पत्र डुमरी विधायक जयराम महतो को संबोधित करते हुए सार्वजनिक किया। इस पत्र में उन्होंने डुमरी बीडीओ, बलथरिया पंचायत के मुखिया पति परमेश्वर नायक, पीएमएवाई के बीसी अजय कुमार और रोजगार सेवक अनिल कुमार साव पर मानसिक प्रताड़ना और कार्यस्थल पर उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा था कि लगातार अपमान और अनुचित दबाव के चलते वे टूट चुके हैं और सिस्टम की चुप्पी ने उन्हें यह कदम उठाने को मजबूर कर दिया।
जांच कमेटी का गठन, अधिकारी सक्रिय
घटना को गंभीरता से लेते हुए गिरिडीह के डीसी रामनिवास यादव ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में अपर समाहर्ता विजय सिंह बिरुआ, एसडीएम संतोष कुमार गुप्ता, डीएसपी नीरज कुमार सिंह और डॉ. रवि महर्षि शामिल हैं। यह टीम डुमरी पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।
विधायक और सांसद ने जताई चिंता, की कार्रवाई की मांग
डुमरी विधायक जयराम महतो ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी भी मृतक के परिजनों से मिले और उन्हें सांत्वना दी।
विधि व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश को देखते हुए डुमरी अनुमंडल प्रशासन ने सात संवेदनशील स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की है, ताकि किसी प्रकार की विधि व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
एसडीपीओ ने क्या कहा?
एसडीपीओ सुमित कुमार राजावत ने पुष्टि की कि सुखलाल महतो की मौत हुई है और इस मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। “प्रशासन की ओर से हर एंगल से जांच की जा रही है। जल्द ही सच्चाई सामने लाने का प्रयास जारी है,” उन्होंने कहा।
यह घटना न केवल एक सरकारी कर्मचारी की पीड़ा का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण स्तर पर कार्यरत कर्मियों को किस प्रकार के मानसिक दबावों से गुजरना पड़ता है। अब सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच से समाधान होगा या व्यवस्था में गहराई से बदलाव की ज़रूरत है?
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